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प्रकृति, समाज, प्रेम, संस्कृति और नदियों को बयां करती कविताएँ
जीवन एक बहती धारा....
मंजी हुई भाषा और जबरदस्त शिल्प-विन्यास
एक आदिवासी भील सम्राट ने प्रारंभ किया था ‘विक्रम संवत’