एक संविधान फिर भी इतने हिंदुस्तान ? हिंदुस्तान का नक्शा उठाइये, उसे गौर से देखिये, देश के बीचों-बीच एक लकीर दिखेगी, पहाड़ों की लकीर। इस लकीर का नाम है विंध्याचल। भूगोल की किताब में यह सिर्फ एक पह…
Read moreडॉ. विजय कुमार "साकी कुछ आज तुझे खबर है बसंत की हर सुबह पेश-ए-नज़र है बसंत की” - उफ़्फ़ुक़ु लखनवी वसंत के आगमन के साथ जब प्रकृति अप…
Read moreलेखक : महेश सिंह आज 12 जनवरी है, यानी राष्ट्रीय युवा दिवस। स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन। पूरा देश आज युवाओं की बात कर रहा है। वादों और दावों का दौर चल रहा है। कई मंचों से बड़े-बड़े भाषण दिए जा रहे …
Read moreसमीक्षक : डॉ. सुमित पी.वी. समकालीन हिंदी कविता के परिदृश्य में जहाँ एक ओर नितांत वैयक्तिक अनुभूतियों का बोलबाला है, वहीं पवन कुमार सिंह का नया कविता संग्रह 'निर्विवाद और अन्य कविताएं' ए…
Read more-महेश सिंह मानव स्वभाव को समझने के लिए दुनियां भर में सदियों से चिंतन-मनन होता आया है। इसके लिए न जाने कितनों ने अपना पूरा जीवन बिता दिया लेकिन यह एक ऐसी पहेली है जो आजतक अनसुलझी है। आप अपने खुद…
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