हाल ही में अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई फिल्म सूबेदार एक ऐसी फिल्म है जो एक साथ कई कहानियों, सामाजिक मुद्दों और मानवीय भावनाओं को समेटने का प्रयास करती है। सुरेश त्रिवेणी द्वारा निर्देशित …
Read moreपहचान और वैचारिक आज़ादी का जरिया हैं मातृभाषाएँ -महेश सिंह मातृभाषा हमारे भीतर की वह पहली आवाज़ है जिससे हम दुनिया को समझना शुरू करते हैं। हम कौन हैं, कहाँ से आए हैं और हमारी पहचान क्या है, यह सब …
Read moreतिमिर में सूर्य-नाद : संत रविदास -महेश सिंह मध्यकालीन इतिहास में जब रूढ़ियों की काई जमने लगी थी और धर्म के नाम पर मनुष्यता शर्मसार हो रही थी तब काशी के घाटों से एक आवाज पाखंड के महलों की नींव हि…
Read moreएक संविधान फिर भी इतने हिंदुस्तान ? हिंदुस्तान का नक्शा उठाइये, उसे गौर से देखिये, देश के बीचों-बीच एक लकीर दिखेगी, पहाड़ों की लकीर। इस लकीर का नाम है विंध्याचल। भूगोल की किताब में यह सिर्फ एक पह…
Read moreडॉ. विजय कुमार "साकी कुछ आज तुझे खबर है बसंत की हर सुबह पेश-ए-नज़र है बसंत की” - उफ़्फ़ुक़ु लखनवी वसंत के आगमन के साथ जब प्रकृति अप…
Read moreलेखक : महेश सिंह आज 12 जनवरी है, यानी राष्ट्रीय युवा दिवस। स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन। पूरा देश आज युवाओं की बात कर रहा है। वादों और दावों का दौर चल रहा है। कई मंचों से बड़े-बड़े भाषण दिए जा रहे …
Read moreसमीक्षक : डॉ. सुमित पी.वी. समकालीन हिंदी कविता के परिदृश्य में जहाँ एक ओर नितांत वैयक्तिक अनुभूतियों का बोलबाला है, वहीं पवन कुमार सिंह का नया कविता संग्रह 'निर्विवाद और अन्य कविताएं' ए…
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