वीरेन नंदा द्वारा निर्देशित फिल्म 'खड़ीबोली के भगीरथ' उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में हिंदी भाषा के विकास और उसके मानक स्वरूप निर्धारण के ऐतिहासिक संघर्ष का विस्तृत दस्तावेजीकरण है। यह फि…
Read moreहाल ही में अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई फिल्म सूबेदार एक ऐसी फिल्म है जो एक साथ कई कहानियों, सामाजिक मुद्दों और मानवीय भावनाओं को समेटने का प्रयास करती है। सुरेश त्रिवेणी द्वारा निर्देशित …
Read moreपहचान और वैचारिक आज़ादी का जरिया हैं मातृभाषाएँ -महेश सिंह मातृभाषा हमारे भीतर की वह पहली आवाज़ है जिससे हम दुनिया को समझना शुरू करते हैं। हम कौन हैं, कहाँ से आए हैं और हमारी पहचान क्या है, यह सब …
Read moreतिमिर में सूर्य-नाद : संत रविदास -महेश सिंह मध्यकालीन इतिहास में जब रूढ़ियों की काई जमने लगी थी और धर्म के नाम पर मनुष्यता शर्मसार हो रही थी तब काशी के घाटों से एक आवाज पाखंड के महलों की नींव हि…
Read moreएक संविधान फिर भी इतने हिंदुस्तान ? हिंदुस्तान का नक्शा उठाइये, उसे गौर से देखिये, देश के बीचों-बीच एक लकीर दिखेगी, पहाड़ों की लकीर। इस लकीर का नाम है विंध्याचल। भूगोल की किताब में यह सिर्फ एक पह…
Read moreडॉ. विजय कुमार "साकी कुछ आज तुझे खबर है बसंत की हर सुबह पेश-ए-नज़र है बसंत की” - उफ़्फ़ुक़ु लखनवी वसंत के आगमन के साथ जब प्रकृति अप…
Read moreलेखक : महेश सिंह आज 12 जनवरी है, यानी राष्ट्रीय युवा दिवस। स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन। पूरा देश आज युवाओं की बात कर रहा है। वादों और दावों का दौर चल रहा है। कई मंचों से बड़े-बड़े भाषण दिए जा रहे …
Read moreसमीक्षक : डॉ. सुमित पी.वी. समकालीन हिंदी कविता के परिदृश्य में जहाँ एक ओर नितांत वैयक्तिक अनुभूतियों का बोलबाला है, वहीं पवन कुमार सिंह का नया कविता संग्रह 'निर्विवाद और अन्य कविताएं' ए…
Read more-महेश सिंह मानव स्वभाव को समझने के लिए दुनियां भर में सदियों से चिंतन-मनन होता आया है। इसके लिए न जाने कितनों ने अपना पूरा जीवन बिता दिया लेकिन यह एक ऐसी पहेली है जो आजतक अनसुलझी है। आप अपने खुद…
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