हिंदी सिनेमा के लंबे इतिहास में आशा भोंसले को सिर्फ एक पार्श्व गायिका के रूप में देखना मुझे लगता है हमारी अधूरी समझ होगी। साठ और सत्तर के दशक का भारतीय समाज और सिनेमा एक बहुत ही तयशुदा रास्ते पर…
Read moreवीरेन नंदा द्वारा निर्देशित फिल्म 'खड़ीबोली के भगीरथ' उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में हिंदी भाषा के विकास और उसके मानक स्वरूप निर्धारण के ऐतिहासिक संघर्ष का विस्तृत दस्तावेजीकरण है। यह फि…
Read moreहाल ही में अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई फिल्म सूबेदार एक ऐसी फिल्म है जो एक साथ कई कहानियों, सामाजिक मुद्दों और मानवीय भावनाओं को समेटने का प्रयास करती है। सुरेश त्रिवेणी द्वारा निर्देशित …
Read moreसिनेमा, साहित्य कला के वह माध्यम हैं जिसके ज़रिये समाज के यथार्थ को सामने लाया जाता है। हालांकि सिनेमा का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य मनोरंजन भी होता है लेकिन उसके साथ देखने वाले दर्शकों को अगर मानव ज…
Read moreहिंदी फ़िल्म संगीत का इतिहास केवल मनोरंजन की कथा नहीं, बल्कि भारतीय समाज के अंतःसंसार का जीवंत दस्तावेज़ भी है। इस इतिहास में कुछ गीतकार ऐसे हुए जिन्होंने प्रेम, विरह और सौंदर्य के पार जाकर मनुष…
Read moreफिल्में समाज का सिर्फ अहम हिस्सा हैं, ये सिर्फ हमारा मनोरंजन नहीं करती बल्कि हमें बहुत कुछ सिखाती भी हैं। जीवन की असंख्य घटनाओं एवं बनते-बिगड़ते संबंधों आदि महत्वपूर्ण विषयों पर बनी फिल्में ह…
Read moreसिनेमा वैसे तो मूल रूप से मनोरंजन का एक साधन या कहिए पर्याय है, लेकिन इसके सामाजिक सरोकार भी हैं। इसी सरोकार के तहत कई फिल्मकारों ने परदे पर मनुष्य के अंतर्मन की अनंत गहराइयों को ऐसे उकेरा जैसे …
Read moreभारतीय सिनेमा के सुनहरे पर्दे पर अनगिनत प्रेम कहानियाँ उभरीं, उनमें से कुछ कल्पना की उड़ान थीं तो कुछ वास्तविक जीवन की मार्मिक गाथाएँ। मगर इन सबमें एक ऐसी प्रेम कहानी भी है जो समय के साथ फीकी पड…
Read moreराकेश कबीर का कविता संग्रह ‘तुम तब आना’ चार विभागों में है। यह संग्रह लोकभारती प्रकाशन से प्रकाशित है। इस काव्य संग्रह में लगभग 97 कविताएं लिखी हैं जिसमें पहले विभाग में ‘ कुछ अपनी बात कहूं’, ‘प…
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