प्यारेलाल गुप्त की 136वीं जयंती पर पाठ सम्मान समारोह आयोजित

साहित्यकार एवं इतिहासकार प्यारेलाल गुप्त जी की 136वीं जयंती के अवसर पर स्थानीय होटल जीत कॉन्टिनेंटल के सभागार में पाठ सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। साहित्य, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े इस गरिमामय आयोजन में साहित्य एवं संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रचनाकारों और कर्मियों को सम्मानित किया गया। समारोह में साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, संस्कृति-कर्मियों एवं शहर के प्रबुद्धजनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

समारोह में कोलकाता के प्रसिद्ध कवि डॉ. सुनील कुमार शर्मा को साहित्यकार एवं इतिहासकार प्यारेलाल गुप्त की स्मृति में ‘पाठ साहित्य सम्मान’ प्रदान किया गया। वहीं कवयित्री एवं संस्कृतिकर्मी निशा भोसले की स्मृति में ‘पाठ संस्कृतिकर्मी सम्मान’ डॉ. सत्यभामा अवस्थी को दिया गया। दोनों सम्मान मुख्य अतिथि डॉ. देवधर महंत, अध्यक्ष नंद कश्यप एवं डॉ. उर्मिला शुक्ल के हाथों प्रदान किए गए। सम्मान प्राप्त करने वाले दोनों रचनाकारों के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने उनके कार्यों की सराहना की।
इस अवसर पर ‘लघु पत्रिकाओं की चुनौतियाँ’ विषय पर ‘पाठ’ के संपादक देवांशु ने अपना आलेख प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लघु पत्रिका का प्रकाशन किसी चुनौतीपूर्ण कार्य से कम नहीं है। लघु पत्रिका केवल साहित्य प्रकाशित करने का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य के संघर्ष और उसकी समस्याओं का लेखा-जोखा प्रस्तुत करने वाली महत्वपूर्ण साहित्यिक पहल है। उन्होंने कहा कि लघु पत्रिकाएँ अपने समय की जरूरतों से संवाद करती हैं और उन सवालों को सामने लाती हैं, जिन्हें मुख्यधारा के प्रकाशन कई बार पर्याप्त महत्व नहीं दे पाते।
देवांशु ने लघु पत्रिकाओं की परंपरा और उनके ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय लोहिया, जयप्रकाश नारायण एवं महात्मा गांधी जैसे नेताओं ने हाथ से लिखे पर्चों का इस्तेमाल किया। बाद में यही पर्चे धीरे-धीरे लघु पत्रिकाओं के स्वरूप में सामने आए और उन्होंने सामाजिक तथा राजनीतिक चेतना के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि लघु पत्रिकाओं ने हमेशा अपने समय की बेचैनी, जनजीवन की समस्याओं और समाज के जरूरी सवालों को अभिव्यक्ति देने का काम किया है।
उन्होंने ‘पाठ’ पत्रिका की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘पाठ’ लघु पत्रिका बिलासपुर शहर से पिछले 20 वर्षों से प्रकाशित हो रही है। इतने लंबे समय से निरंतर प्रकाशित होते हुए यह पत्रिका देश के प्रायः सभी छोटे-बड़े शहरों और गाँवों तक वितरित होती है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद लघु पत्रिकाओं का निरंतर प्रकाशन साहित्य और समाज के बीच संवाद को बनाए रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
लघु पत्रिकाओं की चुनौतियों पर मुख्य अतिथि डॉ. देवधर महंत एवं डॉ. उर्मिला शुक्ल ने भी अपने विचार रखे। दोनों वक्ताओं ने लघु पत्रिकाओं के सामने मौजूद आर्थिक, सामाजिक और प्रकाशन संबंधी कठिनाइयों के साथ-साथ उनके साहित्यिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि अनेक कठिन परिस्थितियों के बावजूद लघु पत्रिकाएँ साहित्य और समाज के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का काम कर रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान साहित्य और संस्कृति की विविधता भी देखने को मिली। रवीन्द्रनाथ टैगोर के शांतिनिकेतन पर अरुणाभो चक्रवर्ती एवं अपर्णा चक्रवर्ती ने बांग्ला भाषा में स्वरचित कविता का पाठ किया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम के साहित्यिक वातावरण को और अधिक समृद्ध किया। बांग्ला कविता पाठ के माध्यम से शांतिनिकेतन की सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक परंपरा को भी कार्यक्रम से जोड़ा गया।
इस अवसर पर सी.के. खांडे, कर्मचारी नेता एवं वरिष्ठ साहित्यकार तथा उद्घोषक हरीशचन्द्र वाद्यकार को भी सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान उपस्थित साहित्यकारों और संस्कृतिकर्मियों ने उनके योगदान को भी रेखांकित किया।
डॉ. सुनील कुमार शर्मा के साहित्यिक अवदान पर चर्चा करते हुए भोपाल से आईं माया मिश्र एवं इंदौर से आईं रश्मि मालवीय ने उनके साहित्य पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने डॉ. शर्मा की रचनात्मकता, साहित्यिक दृष्टि और उनके लेखन की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उनके साहित्यिक योगदान को महत्वपूर्ण बताया।
पूरे कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र मौर्य ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की विभिन्न कड़ियों को प्रभावी ढंग से जोड़ते हुए समारोह को गरिमापूर्ण और व्यवस्थित रूप प्रदान किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में कोलकाता के कवि आदित्य विक्रम सिंह का सराहनीय योगदान रहा। आयोजन में विजय कुमार गुप्त, रमेश सोनी, शिवांगी, प्रो. मुरली, कपूर वासनिक, शिप्रा पाल, सुप्रिया भारतीयन, रेबा दास, आभा पाल, मधुकर गोरख, सुनील चिपड़े, अभिषेक पाल के अलावा शहर के अनेक साहित्यकार, बुद्धिजीवी एवं प्रबुद्धजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
प्यारेलाल गुप्त की जयंती के अवसर पर आयोजित यह समारोह साहित्य, इतिहास और संस्कृति के प्रति सम्मान के साथ-साथ साहित्यिक सरोकारों और लघु पत्रिकाओं की भूमिका पर गंभीर संवाद का अवसर भी बना। सम्मान, कविता पाठ, आलेख वाचन और विचार-विमर्श से सजा यह आयोजन साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय लोगों की साझा उपस्थिति और प्रतिबद्धता का परिचायक रहा।

प्रस्तुति : देवांशु

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